पुरानी से पुरानी खुजली और पथरी को जड़ से ख़त्म कर देता है ये पत्ता,जाने इस्तेमाल करने का तरीका
दोस्तों, हम जिस पत्ते के बारे में बात करने जा रहे हैं वह आक का पत्ता है. इसका उपयोग आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी में किया जाता है. यह एक मृदु उपविष है. जिसका उपयोग आयुर्वेद में कई तरह के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है. गांव- देहातों में आसानी से मिल जाता है. कैलोटरोपिस जाईगैन्टिया नाम से यह होम्योपैथ औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
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चलिए जानते हैं-
1 .आक के 10 सूखे पत्ते सरसों के तेल में उबालकर जला लें. फिर इस तेल को छानकर ठंडा होने पर इसमें कपूर की चार टिकिया का चूर्ण को अच्छी तरह से मिलाकर इसे सुरक्षित शीशी में रख लें. अब इस तेल को खाज- खुजली वाले जगह पर तीन बार लगाएं. इससे कितनी भी पुरानी खुजली हो जड़ से खत्म हो जाती है.
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2 .त्वचा में एलर्जी के कारण हुई खुजली की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आक की जड़ को जला लें. अब इसकी राख को कड़वे तेल में मिलाकर खुजली वाले जगह पर लगाएं. खुजली की परेशानी दूर हो जाएगी.
3 .आक के 10 फूल को पीसकर एक गिलास दूध में अच्छी तरह से घोलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से पथरी निकल जाती है. इसे लगातार 40 दिनों तक पीना चाहिए.
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4 .तिल का तेल गर्म करके बाल निकालने वाले स्थान पर लगाएं. अब आक के पत्ता को गर्म करके उस स्थान पर यही तेल लगाकर बांध दें. आक के फूल की डोडी के अंदर का छोटा सा टुकड़ा गुड़ में लपेट कर खाने से बाला नष्ट होता है. बाला रोग ठीक हो जाएगा.
5 .आक के पत्ता और डंठल को पानी में भिगो दें. अब इस पानी को पीने से बवासीर की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी. वहीं प्रतिदिन सुबह इस पौधे की पत्तियों को पैर के नीचे रखकर जुराबे डाल लें. रात को सोने से पहले इसे निकाल दें. इसका इस्तेमाल नियमित करने से शुगर कंट्रोल रहती है.
दोस्तों, यह पोस्ट आपकी जानकारी के लिए है इसके इस्तेमाल करने से पहले किसी जानकार व्यक्ति से सलाह ले लें.
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