गर्भाशय कैंसर के लक्षण और बचाव के उपाय
किरण आयुर्वेद- जब गर्भाशय की आंतरिक परत की कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है तो उस स्थिति में गर्भाशय कैंसर होता है. इसे बच्चेदानी का कैंसर भी कहते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह कोशिकाएं अधिक बढ़कर शरीर के अन्य भागों में भी कैंसर उत्पन्न कर सकती है. इसका आकार नाशपाती जैसा होता है. जन्म लेने से पहले बच्चे महिलाओं के गर्भ के इसी भाग में रहते हैं. गर्भाशय में 2 मुख्य भाग होते हैं गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय का निचला भाग गर्भाशय के ऊपरी हिस्से को कॉरपस कहा जाता है. यदि गर्भाशय ग्रीवा भी गर्भाशय का ही हिस्सा होता है. जब लोग गर्भाशय कैंसर के बारे में बात करते हैं तो उनका मतलब कॉरपस में कैंसर ही होता है ना कि गर्भाशय ग्रीवा में.
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बच्चेदानी के कैंसर का मुख्य लक्षण प्राइवेट पार्ट से असामान्य रक्तस्राव या स्पॉटिंग है. एंडोमेट्रियल कैंसर का सही कारण अभी तक पता नहीं चला है. लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एस्ट्रोजन का उच्च स्तर इसके लिए काफी जिम्मेदार हो सकता है. इससे ग्रसित महिलाओं का उपचार ज्यादातर सर्जरी द्वारा ही किया जाता है.
गर्भाशय कैंसर के मुख्य लक्षण-
* गर्भाशय में कैंसर होने पर सबसे आम लक्षण प्राइवेट पार्ट से असामान्य रक्त स्राव या स्पॉटिंग है. लेकिन यह जरूरी लक्षण प्रदर्शित होने पर आप कैंसर से ही पीड़ित हो इनके कई और कारण भी हो सकते हैं. इसलिए चिकित्सक की अवश्य सलाह लें.
* रजोनिवृत्त होने के बाद प्राइवेट पार्ट से सफेद पानी आना.
* मासिक धर्म के बीच में रक्त स्राव होना या मासिक धर्म का सामान्य से अधिक एवं अधिक दिनों तक जारी रहना.
* अत्यधिक रक्तस्राव होना लंबे समय तक रक्त स्राव होना या 40 वर्ष से ज्यादा की उम्र में अधिक रक्तस्राव का होना कैंसर का लक्षण हो सकता है.
* पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना एवं संबंध के दौरान अधिक दर्द महसूस होना.
गर्भाशय कैंसर से बचाव-
आपको बता दें कि आप एंडोमेट्रियल कैंसर से बचाव नहीं कर सकती हैं. परंतु उसके होने की संभावना पर जरूर कंट्रोल कर सकती हैं. इससे बचाव करने के लिए शरीर का वजन को नियंत्रित रखें. क्योंकि शरीर की वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजन बनाती है. यदि आप सक्षम है तो ब्रेस्टफीड कराएं. यह ओव्यूलेशन और एस्ट्रोजन गतिविधि को कम करने में सहायक होता है और सामान्य रक्त स्राव का तुरंत उपचार कराएं. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें. यह आपके वजन को नियंत्रित रखने और एस्ट्रोजन का स्तर को कम करने में मददगार होता है. फल और सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें.
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