कब्ज और बवासीर को जड़ से ख़त्म करता है ये जड़ी-बूटी
दोस्तों, आयुर्वेद में कई तरह के कंदमूल का औषधि बनाने के काम में लाया जाता है. आज हम एक कंदमूल के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका नाम है जिमीकंद. जिसका लोग सब्जी व अचार बना कर खाते हैं. यह सर्दी के दिनों में हर्ब की तरह काम करती है. देखने में आम और मिट्टी के रंग की यह सब्जी जमीन के नीचे उगती है. इसे सुरण कंद या ओल के नाम से भी जाना जाता है. जिमीकंद में फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, विटामिन b1, फोलिक एसिड और नियासिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. साथ ही इसमें मिनरल्स जैसे पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस भी पाए जाते हैं. जिमीकंद का सब्जी खाना सर्दी के दिनों में काफी फायदेमंद होता है. जिमीकंद में कॉपर पाया जाता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में ब्लड फ्लो को दुरुस्त करता है और आयरन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मददगार होता है.
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चलिए जानते हैं फायदे-
1 .जिमीकंद दिमाग को तेज करने में मददगार होता है. इसे खाने से मेमोरी पावर बढ़ती है. साथ ही अल्जाइमर रोग होने से भी बचाता है. दिमाग को तेज करने के लिए जिमीकंद को अपने आहार में शामिल करें. जिमीकंद में अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन मौजूद होता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकलस से लड़ने में मददगार होता है.
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2 .जिमीकंद में मौजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी गुणों के कारण गठिया और अस्थमा के रोगियों के लिए सबसे अच्छा होता है. जिमीकंद में पोटैशियम की मौजूदगी होने के कारण यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करता है. इसे नियमित रूप से खाने से कब्ज और खराब कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाती है. शरीर में अच्छी मात्रा में विटामिन बी6 होने से दिल की बीमारी नहीं होती है. जिमीकंद में विटामिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है और रक्तचाप को नियंत्रित करके को स्वस्थ रखने में मदद करता है.
3 .जिमीकंद में ओमेगा-3 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है या खून के थक्के जमने से रोकता है. जिमीकंद का अधिकतर उपयोग बवासीर, सांस रोग, खांसी, आमवात और क्रीमी रोगों में किया जाता है.
4 . बवासीर में जिमीकंद की सब्जी का सेवन करने से बहुत राहत मिलती है. इसके सेवन से बात रोग यानी पेट के रोगों में फायदा होता है. जिमीकंद को अगर सही तरीके से उबाला नहीं गया है तो इससे गले में खराश होने लगती है. इसके अलावा इसे काटते समय हाथों पर भी तेल लगा लें क्योंकि ऐसा न करने से हाथों में खुजली हो सकती है.
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आयुर्वेद के मुताबिक जिमीकंद उन लोगों को नहीं सेवन करना चाहिए जिनको किसी प्रकार का चर्म रोग हो, जिमीकंद ड्राइ, कसैला, खुजली करने वाला होता है. इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी जिमीकंद का सेवन नहीं करना चाहिए.
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