अल्जाइमर होने के कारण,लक्षण और आयुर्वेदिक चिकित्सा
अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का एक प्रकार है. अल्जाइमर रोग होने पर व्यक्ति की यादाश्त कम होने लगती है. व्यक्ति सही समय पर ठीक से कोई निर्णय लेने में, बोलने में और चीजों को समझने में परेशानी होने लगती है. यह रोग व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक रूप से काम करने पर नकारात्मक प्रभाव डालता है.
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आपको बता दें कि शुरुआत में अल्जाइमर होने पर मरीजों को कई बातें भूलने की बीमारी होती है. धीरे-धीरे यह बीमारी इतनी अधिक हो जाती है कि व्यक्ति रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातें भी भूलने लगता है. कुछ समय बीतने पर एक समय ऐसा भी आता है कि वह लोगों के नाम, अपने घर का पता या नंबर, खाना, बैंक संबंधी काम, नित्य क्रिया दैनिक आज तक भूलने लगते हैं. अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति के लिए किसी नई जानकारी या घटना को याद करना और याद रखना मुश्किल हो जाता है. धीरे-धीरे पुरानी यादें भी मिट्टी चली जाती है.
अल्जाइमर के लक्षण-
छोटी-छोटी बातों को भूल जाना, अपना घर का पता भूलना, अपने आसपास के माहौल तक को भूल जाना, भूलने की बीमारी होने पर पीड़ित व्यक्ति को कोई सामान्य दिनचर्या खाना पकाने में कठिनाई होने लगते हैं. रोग से पीड़ित व्यक्ति को बोलने में दिक्कत महसूस होती है. यहां तक कि साधारण वाक्य शब्द भी नहीं बोल पाता है. इस से पीड़ित व्यक्ति को ना सिर्फ बोलने में फर्क आता है बल्कि उसकी लेखन शैली भी बदल जाती है. उसकी लिखावट को पहचान पाना मुश्किल होता है. कोई निर्णय लेने में उसे काफी दिक्कत आती है. कोई सामान को रहकर व्यक्ति भूल जाता है. अचानक मूड में बदलाव आ जाना, बेवजह किसी पर गुस्सा करना यह अल्जाइमर के लक्षण है.
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अल्जाइमर होने के कारण-
अल्जाइमर रोग होने के कई कारण हो सकते हैं. लेकिन अधिकांश मामलों में इसके कारणों का पता नहीं चलता है. केवल 5% रोगियों में इसके कारण जात होते हैं. कुछ मामलों में हाई ब्लड प्रेशर होना, डायबिटीज होना और लाइफ़स्टाइल खराब होना इसकी मुख्य बड़ी वजह है या किसी दुर्घटना के दौरान सिर में चोट लगने से भी भूलने की बीमारी हो जाती है.
चलिए जानते हैं अल्जाइमर का आयुर्वेदिक उपाय-
आयुर्वेद में इस बीमारी को स्मृति फ्रांस नाम से जाना जाता है. आयुर्वेद में अल्जाइमर का समन चिकित्सा की जाती है. इस चिकित्सा के अंतर्गत अश्वगंधा, सर्पगंधा, शंखपुष्पी, ब्राम्ही, ज्योतिषमति, हरिद्रा, कपिकच्छू की औषधियों का चूर्ण बनाकर गाय के दूध के साथ सेवन की जाती है. इसके अलावा पंचगव्य, घृत, ब्राह्मी घृत आदि बहुत से सैकड़ों औषधियों के द्वारा योग्य वैद्य की देखरेख में अल्जाइमर की चिकित्सा की जा सकती है.
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संशोधन चिकित्सा भी अल्जाइमर से बचाव करने में मददगार होता है. इस चिकित्सा में पंचकर्म चिकित्सा करते हैं. जिसमें शिरोधारा और शिरोबस्ती से बहुत लाभ होता है.
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