कभी भी न रोकें शरीर का ये 10 वेग, वरना हो सकती है शारीरिक और मानसिक परेशानी


हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शरीर के जरूरतों के अनुसार हर काम करना चाहिए.जैसे समय पर भोजन करना,समय पर शौच,पेशाब आदि करना.लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम अपने शरीर के अनुसार काम नही कर पाते हैं और शरीर के कई वेगों को हम रोक कर रखे रहते हैं.जिसका खामियाजा हमें चुकाना पड़ता है.इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से कुछ शरीर के कुछ ऐसे वेगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे भूलकर भी नही रोकना चाहिए वरना शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पद सकता है.
तो चलिए जानते हैं विस्तार से-
1 .पेशाब-पेशाब के वेग को भूलकर भी नही रोकना चाहिए क्योंकि इसके वेग को रोकने से पेडू और लिंगेन्द्रिय में दर्द होता है और बाद में रुक-रुक कर पेशाब कष्ट से होता है.सर दर्द होता है.शारीर सीधा नही होता है.पेट में अफरा और पेडू और पेट में दर्द के साथ आँखें कमजोर होती है.
2 .पखाना-पखाना लगन्रे के बाद इसके वेग को नही रोकना चाहिए.इसके वेग को रोकने से पेट में गडगडाहट,पेट दर्द,मल साफ नही होता है,डकारे आती है.मस्तिष्क में दर्द होता है और पेट फूल जाता है.
3 .विर्यवेग-इसे रोकने से मूत्राशय में सूजन,गुदे और फोतों में दर्द,पेशाब कष्ट से होना,शुक्र की पथरी,और धातु सम्बंधित अनेक रोग होते हैं.चरक संहिता के अनुसार विर्यवेग रोकने से शरीर टूटना,अंगडाई आना,ह्रदय में पीड़ा और पेशाब रुक-रुक कर आना के साथ मानसिक संतुलन ख़राब हो सकते हैं.

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4 .अधोवायु-अधोवायु यानि गुदे से निकलने वाला हवा को लोग शर्मौर लज्जावश रोककर रख्रते हैं.जिस वजह से मल-मूत्र दोनों रुक जाते हैं.जिससे पेट फूलना, थकान महसूस होना,पेट दर्द होना और शरीर में वायुविकार होने लगता है.
5 .उल्टी-उल्टी का वेग रोकने से शरीर में चकते,खुजली,अरुचि,मुंह पर झाई सूजन,पीलिया आदि उपद्रव होते हैं.
6 .छिक-इसके वेग को रोकने से गर्दन के पीछे के मन्या नामका नर्वस जकड़ जाती है.सर में दर्द होने लगते हैं.आधा मुंह टेढ़ा हो जाता है.अर्धांग बात रोग हो सकता है.चरकसंहिता में वर्णन मिलता है कि छिक रोकने से लकवा,गर्दन जकड़ना,मस्तक शूल,आधा शीशी का दर्द हो सकता है.इसलिए आते हुए छिक के वेग को नही रोना चाहिए.
7 .ढकार-अक्सर लोगों को खाना खाने के बाद ढकार आता है जिसका वेग भूलकर भी नही रोकने चाहए.क्योंकि ढकार के वेग को रोकने से बादी रोग होते हैं.कंठ और मुंह का भारी सा मालूम होना,हिचकी,खांसी,अरुचि,ह्रदय और चेस्ट में बंधा महसूस होना,और ढकार के वेग रोकने से कब्ज,गैस की समस्या हो जाती है.

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8 .जम्हाई-जम्हाई का वेग को नही रोकना चाहिए इसे रोकने से गर्दन की पीछे का नस जकड जाना,बादी विकार होना,नेत्ररोग,नासारोग,मुख्रोग और कान का रोग होना होता है.
9 .भूख-इसके वेग को रोकने से शारीर में कई समस्याए होती है,इसके वेग को रोकने से तन्द्रा,शरीर टूटना,अरुचि,थकान,आँखों के आगे अँधेरा छाना,कमजोरी होना जैसी समस्या होती है.भोजन शरीर के लिए महत्वपूर्ण है इसलिए समय पर भोजन करना चाहिए.
10 .प्यास-इसके वेग को रोकने से मुंह सुखना,गले का सुखना शरीर का डीहाइड्रेट होना,कानों में कम सुने देना और ह्रदय में पीड़ा होती है.
दोस्तों,यह जानकारी आपको जरुर अच्छी लगी होगी.अगर अच्छी लगी हो तो लाइक,शेयर करें.
धन्यवाद.
आयुर्वेद चिकित्सक-डॉ.पी.के,शर्मा.

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