स्वाइन फ्लू के लक्षण और बचाव के उपाय
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है.इन्फ्लुएंजा इ स्वाइन फ्लू वायरस के एक प्रकार h 1,n 1 संक्रमित व्यक्ति द्वारा दुसरे व्यक्ति में फैलता है और यह बीमारी हमरे देश में धीरे-धीरे पाँव पसार रहा है.
स्वाइन फ्लू के लक्षण-
स्वाइन फ्लू में तेज बुखार आता है .नाक से पानी आना,भूख न लगना,सांस लेने में परेशानी,गले में जलन,सिरदर्द,जोड़ों में सूजन,पेट कि गड़बड़ी या डायरिया भी हो सकता है.
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय-
स्वाइन फ्लू का असर रोग प्रतिरोधकक्षमता की कमजोरी होने पर असर करता है इससे बचने के लिए जैसे साधारण सर्दी-जुकाम में करते हैं वैसे ही इलाज किया जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने का उपाय किया जाता है और डॉक्टर के बताये अनुसार सावधानियां बरतकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है .
कुछ घरेलू उपाय हैं जो आपकी भरपूर मददगार साबित हो सकते हैं.
1 .तुलसी-तुलसी कि 5-6 पत्तियों को चबाना फायदेमंद होता है क्योंकि तुलसी में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरस गुण होते है जिससे ये सबसे अच्छे जाते है यह स्वाइन फ्लू को ठीक कर देगी ऐसा तो नही कहा जा सकता पर h1, n1,वायरस से लड़ने कि क्षमता रखता है जिससे बचाव कि संभावना बढ़ जाती है.
2 .कपूर-कपूर की छोटी मात्रा में सेवन करना स्वाइन फ्लू को रोकने में सहायक होता है बड़ों में सिर्फ कपूर दिया जा सकता है लेकिन बच्चों को रोटी या केला के साथ हल्की मात्रा में दिया जाता है इसे महीने में एक बार देते रहने से स्वाइन फ्लू का खतरा नही के बराबर होता है.
3 .लहसून-लहसून कि एक दो कलियों को छीलकर खाते रहने से स्वाइन फ्लू नही के बराबर होने कि संभावना रहता है क्योंकि लहसून में एंटी वायरल गुण होते है और रोग प्रतिरोधक में भी इजाफा होता है.
4 .हल्दी -गुनगुने दूध में हल्दी का सेवन कई रोगों को दूर रखने में मदद करता है और साथ ही रोग प्रतिरोधक को बढ़ावा देता है और रोज एक गिलास दूध में हल्दी मिलकर पीने से स्वाइन फ्लू का असर कम होता है.क्योंकि हल्दी को गर्म करने पर भी इसके गुण नष्ट नही होते हैं इसलिए महीने में एक दो बार हल्दी का सेवन सब्जी के अलावा एनी रूपों में करना चाहिए.

सर्दी-जुखाम और बुखार होने पर डॉक्टर से सलाह लें और फ्लू के लक्षण मिलने पर डॉक्टर के सलाह का पालन करें.
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