जानिए-होली क्या है और रंगों से क्यों केला जाता है?
नमस्कार दोस्तों,आपके पुरे परिवार को होली की बहुत-बहुत बधाई.आज इस लेख में जानेंगे होली क्या है और इसे रंगों से होली खेला जाता है.
आइये जानते हैं होली क्या है?
होली एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे हिन्दू धर्म के लोग बड़े धूम-धाम से मनाते हैं.होली समस्त भारत के अलावा नेपाल और अन्य देशों में भी मनाया जाता है.यह त्यौहार बसंत ऋतु में मनाया जाता है जो हिन्दू शास्त्र और पंचांगों के अनुसार फाल्गुन मास के पूर्णिमा को मनाया जाता है.हिन्दू शास्त्रों के अनुसार होली की कई कथाएं मिलती है.
1 .हिरण्यकश्यप नामक राक्षस अपने को भगवान् समझता था लेकिन उसका ही पुत्र उसे भगवान नही मानता था और वह नारायण का भक्ति करता था. जिसका नाम प्रह्लाद था. जब किसी भी प्रयास के बाद प्रह्लाद ने हिरण्यकश्यप को भगवान नही माना तो हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को जान से मरने की योजना बनाई और अपनी बहन होलिका को उकसाया की वह चादर ओढ़कर जिसपर आग का प्रभाव नही पड़ता है प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ जाएगी और इस प्रकार प्रह्लाद राख हो जायेगा और होलिका उस चादर के प्रभाव के कारण बच जाएगी.लेकिन नारायण की मर्जी जास्त उल्टा हुआ चादर प्रह्लाद के ऊपर चली गयी और प्रह्लाद बच गया और होलिका ही जलकर राख हो गयी.
इस प्रकार अधर्म पर धर्म का विजय हुआ.और उसी दिन से होलिका दहन की प्रथा शुरू हुई और उसके दुसरे दिन होली खेलते यानि रंग अबीर लगाते हैं जिसे धुलण्डी कहते है.
2 .कंस कृष्ण भगवान का मामा था.और कण को आकाशवाणी हुई थी की तुम्हारा बहन का आठवां पुत्र तुम्हारा वध करेगा उसी दिन से अपने बहन के सभी पुत्रों का वध करने की योजना कंस ने बनाई और श्री कृष्ण को मारने के लिए राक्षसी पूतना को कृष्ण के पास भेजा जब राक्षसी पूतना ने विषपूर्ण दुग्ध पिलाने लगी तो श्री कृष्ण ने दुग्धपान करते- करते पूतना को वध कर दिए.
लेकिन जब पूतना का वध किये तो पूतना का शरीर गायब हो गया और उस गाँव के लोगों ने पूतना का पुतला बनाकर दहन करते हुए खुशियाँ मनाई.उसी समय से मथुरा में होली का उत्सव मनाये जाने लगा.
होली को रंगों से क्यों खेला जाता है?
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण सावले रंग के थे और राधा गोरी और सुन्दर थी साथ ही गोपियाँ भी सुन्दर थीं यह बातें श्री कृष्ण माता यशोदा को हमेशा कहते थे की आखिर ऐसा क्यों है इस बात को लेकर माता यशोदा ने भगवान् श्री कृष्ण को बोली राधा को जिस रंग में देखना चाहते हैं उसी रंग को राधा को लगा दें.यह बात कृष्ण को अच्छी लगी और वे तरह-तरह के रंग लेकर राधा को रंगने चल पड़े और राधा को कई तरह के रंगों से रंग दिए साथ ही गोपियाँ भी रंग में रंग गयीं.
लेकिन जब ये कृष्ण के शरारत सभी को अच्छी लगने लगी तो उसी समय से एक परंपरा के रूप में होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार बन गया और हर साल मनाये जाने लगा.
आयुर्वेद के अनुसार हल्दी,चन्दन,गुलाब जल और टेसू के फुल आदि में कई तरह के एंटी बैक्टीरियल,किट-पतंगे नाशक और हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं और पुराने जमाने में यही चीजों से रंगों का निर्माण किया जाता था जो कई रोगों से दूर रखने में हमारी मदद करता था इसलिए इसे परंपरा के रूप में साल में एक बार लगाना फायदेमंद होता है.
दोस्तों,कोई भी त्यौहार खुशहाली के लिए मनाया जाता है लेकिन कई लोग इसे गलत इस्तेमाल करते हैं और कई बार खाने पीने की चीजों में नशीले चीजों का इस्तेमाल करते है या रंगों में कोई केमिकल्स मिलते है जो त्वचा को नुकसान पहुचाती है होली में कई तरह के बम -पटाखे छोड़े जाते हैं जो हमारे वातावरण को दूषित करते है जो हमारे स्वास्थ को नुकसान पहुचाते है कई बार बच्चे पटाखे से जलने की शिकायत होती है इसलिए अपने आप को सुरक्षित रखते हुए दूसरों की सुरक्षा का भी ख्याल रखें और होली को खुशहाल बनायें.
एक बार फिर से होली की बहुत बहुत बधाई.यह लेख अच्छी लगे तो फ़ॉलो और शेयर करें.

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