बवासीर होने से पहले शरीर देता है ये संकेत

बवासीर होने से 1 महीने पहले शरीर में दिखते हैं ऐसे 5 संकेत.इन्हें पहचानें वरना जिंदगी दर्दभरी हो जाएगी






New Delhi : बवासीर जिसे अंग्रजी भाषा में पाइल्स कहा जाता है, एक बहुत ही ख़तरनाक रोग है। बवासीर के मुख्यतः दो प्रकार है , एक खूनी बवासीर और दूसरा बादी बवासीर। आमतौर पर देखा गया है, कि बवासीर 40 से 60 की उम्र में होता है. लेकिन यह इससे पहले भी हो सकता है।
यह बीमारी अनुवांशिक भी हो सकती है, जो घर में पीढ़ियों से चली आ रही हो। यह बीमारी इतनी ख़तरनाक है, कि यह आखिर समय में कैंसर का ख़तरनाक रूप भी धारण कर सकती है। बवासीर होने का मुख्य कारण, मलाशय और गुर्दो की वाहिनियां में सूजन हो जाता है.। इस लेख में आपको बवासीर के लक्षणों की विस्तार से जानकारी दी जा रही है :
बवासीर को शरीर में आये फर्क के आधार पर देखें तो यह दो प्रकार की होती है, बहार बवासीर और आंतरिक बवासीर। बाहरी बवासीर : बाहरी बवासीर में रोगी के गुदा के आसपास बहुत सारे मस्से होने लगते हैं। जिसमें सिर्फ खुजली होती है दर्द नहीं। लेकिन यह खुजली इतनी तेज़ होती है, कि जब रोगी इसे खुजलाये तो वहाँ पर रक्त आ जाता है।
आंतरिक बवासीर : आंतरिक बवासीर में फर्क बस इतना है, कि यह मस्से गुदे के अंदर होते हैं और जब नित्य क्रिया करते समय ज़ोर लगता है, तो यह काफी तकलीफ और दर्द देते हैं, जिस वजह से खून आने लगता है। इसके अलावा कुछ निम्न लक्षण भी बवासीर के रोगियों में देखे गए है : * खुजली इसका प्रमुख लक्षण है और मलाशय में कुछ अटकने का एहसास होना। * जिन्हें बादी बवासीर होती है, उन्हें काले रंग के मस्से होते है। * बवासीर में दर्द और जलन यह दो प्रमुख लक्षण है।
* नित्य क्रिया करते समय मस्सो का बहार आना , कई बार ये स्वयं ही अंदर की और चले जाते हैं, लेकिन कई बारे इन्हें धकेलना भी पड़ता है। * टॉयलेट करते समय भी रक्त स्त्राव हो जाता है। यह कभी बूँद-बूँद तो कभी एक धार में प्रवाह होता है।
बवासीर होने से एक महीने पहले के संकेत : गुदा में खुजली। पेट में अपच। मल में भयंकर बदबू। दिन में बार बार मल जाना। गुदा पर ज्यादा पसीने आना। इस तरह के संकेते मिलें तो समझ लें आपको पाइल्स होने वाली है। बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार : बवासीर बहुत ही पीड़ादायक रोग है। इसका दर्द असहनीय होता है।आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है। फाइबर युक्त आहार : अच्‍छे पाचन क्रिया के लिए फाइबर से भरा आहार बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपने आहार में रेशयुक्त आहार जैसे साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें। साथ ही फलों के रस की जगह फल खाये। छाछ : बवासीर के मस्‍सों को दूर करने के लिए मट्ठा बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए करीब दो लीटर छाछ लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्‍वादानुसार नमक मिला दें। प्यास लगने पर पानी के स्‍थान पर इसे पीये। चार दिन तक ऐसा करने से मस्‍से ठीक हो जायेगें। इसके अलावा हर रोज दही खाने से बवासीर होने की संभावना कम होती है। और बवासीर में फायदा भी होता है।
त्रिफला : आयुर्वेंद की महान देन त्रिफला से हम सभी परिचित है। इसके चूर्ण का नियमित रूप से रात को सोने से पहले 1-2 चम्‍मच सेवन कब्‍ज की समस्‍या दूर करने मेंं मदद करता है। जिससे बवासीर में राहत मिलती है। जीरा : छोटा सा जीरा पेट की समस्‍याओं बहुत काम का होता है। जीरे को भूनकर मिश्री के साथ मिलाकर चूसने से फायदा मिलता है। या आधा चम्‍मच जीरा पाउडर को एक गिलास पानी में डाल कर पियें। इसके साथ जीरे को पीसकर मस्‍सों पर लगाने से भी फायदा मिलता है।
अंजीर : सूखा अंजीर बवासीर के इलाज के लिए एक और अद्भुत आयुर्वेदिक उपचार हैं। एक या दो सूखे अंजीर को लेकर रात भर के लिए गर्म पानी में भिगों दें। सुबह खाली पेट इसको खाने से फायदा होता है। तिल : खूनी बवासीर में खून को रोकने के लिए 10 से 12 ग्राम धुले हुए काले तिल को लगभग एक ग्राम ताजा मक्खन के साथ लेना च‍ाहिए। इसे लेने से भी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
हरीतकी : हरड़ के रूप में लोकप्रिय हरीतकी कब्‍ज को दूर करने का एक बहुत अच्‍छा आयुर्वेदिक उपाय है। हरीतकी चूर्ण आधा से एक चम्मच, रात को गुनगुने पानी से लेने से या गुड़ के साथ हरड खाने से बवासीर की समस्‍या से निजात मिलता है। बड़ी इलायची : लगभग 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए। ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से सुबह पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर की समस्‍या ठीक हो जाती है।
आंवला : आयुर्वेद में आंवले को बहुत महत्ता प्रदान की गई है, जिससे इसे रसायन माना जाता है। यह शरीर में आरोग्य शक्ति को बढ़ाता है।आंवला पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। बवासीर की समस्‍या होने पर आंवले के चूर्ण को सुबह-शाम शहद के साथ पीने से फायदा होता है। नीम : नीम के छिलके सहित निंबौरी के पाउडर को प्रतिदिन 10 ग्राम रोज सुबह रात में रखे पानी के साथ सेवन कीजिए, इससे बवासीर में फायदा होगा। इसके अलावा नीम का तेल मस्सों पर लगाने और इस तेल की 4-5 बूंद रोज पीने से बवासीर में लाभ होता है।
गुलाब की पंखुडियां : बवासीर में खून की समस्‍या को दूर करने के लिए बहुत ही अच्‍छा आयुर्वेदिक उपचार है। इसके लिए थोड़ी सी गुलाब की पंखुडी को 50 मिलीलीटर पानी में कुचल कर तीन 3 दिन खाली पेट लेना चाहिए। लेकिन ध्‍यान रहें इस उपचार के साथ केले का सेवन न करें।

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