क्या जानते हैं ?साल में दो बार नवरात्रि मनाने का कारण

नमस्कार दोस्तों,इस चैनल में आपका स्वागत है.दोस्तों आप जानते होंगे की नवरात्रि साल में दो बार मनाये जाते हैं जो हमारे देश में एक मार्च और अप्रेल में और दूसरा सितम्बर और अक्टूबर में मनाई जाती है.जिसमे नव दिनों तक माँ दुर्गा के नव रूपों की पूजा की जाती है हालाँकि साल में 5 नवरात्र होते हैं जिसमे 3 गुप्त नवरात्र के नाम से जाने जाते हैं.जिसे साधू-महात्मा लोग ही जानते हैं बाकि लोग बहुत कम ही इसके विषय में जानते हैं.

लेकिन दोस्तों बात आती है कि हिन्दू धर्म में साल में कई पर्व त्यौहार होते हैं जो दो बार नही मनाया जाता है लेकिन नवरात्र दो बार क्यों मनाया जाता है.
तो आइये जानते हैं नवरात्रि साल में दो बार मनाये जाने के कारण-
दोस्तों दोनों नवरात्र ऐसे समय में आते हैं जब लगभग दिन और रात का समय सामान्य के आस-पास होता है और मौसम भी लगभग सामान्य रहता है न ज्यादा गर्मी रहती है और न ज्यादा ठंढा रहता है.अगर वैदिक विज्ञान की माने तो इस मौसम में पूजा और सात्विक भोजन करने से हमारे शरीर में ऊर्जा संतुलित रहती है जो हमारे मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से स्वास्थ के लिए फायदेमंद रहते हैं.
दोस्तों,पुराने ज़माने में मौसम बदलने के साथ-साथ अपने खान-पान भी बदल लेते थे इस नव दिन के बरत के बहाने अपने शरीर को मौसम के अनुरूप बदलने का मौका भी मिल जाता था.
दोस्तों पौरान्विक कथाओं के अनुसार-
जो नवरात्र मार्च और अप्रैल में मनाये जाते हैं. जब रावण ने माँ सीता को हरण कर लंका ले गया था तो श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त कर माँ सीता को छुड़ाने के लिए माँ दुर्गा की स्तुति कर नौ दिन में नौ रूपों की पूजा की थी और माँ दुर्गा के वरदान पाकर रावण का वध किये थे इस लिए मार्च और अप्रैल में मनाये जाने वाले नवरात्र को रामनवमी के नाम से जाना जाता है.
दोस्तों जो नवरात्र सितम्बर और अक्टूबर में मनाया जाता है उसके पीछे का कारण यह है कि महिषासुर पराक्रमी राक्षस ने भगवन शंकर की पूजा कर अत्यंत शक्ति प्राप्त की और निर्दोष लोगों पर अत्याचार करने लगा.इस अत्याचार से परेशान होकर स्वर्ग की देवताओं ने शंकर जी,भगवन विष्णु और ब्रह्मा आदि ने मिलकर एक योजना बनायीं और उन्होंने देवी दुर्गा के रूप में एक दिव्य योद्धा महिला की उत्पति की और जब महिषासुर ने दिव्य देवी दुर्गा को देखा तो मोहित होकर देवी दुर्गा से शादी करने को कहा.लेकिन देवी दुर्गा ने एक शर्त रखी अगर तू हमसे लड़ाई में जित जाओगे तो मई तुमसे शादी करुँगी.इस शर्त को महिषासुर मन लिया और दोनों में युद्ध चलने लगा.अंततः माँ दुर्गा ने महिषासुर को मर गिरायी .और दशवे दिन ख़ुशी के मौके पर दशहरा मनाया गया इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हुई तभी से नवरात्र की शुरुआत हुई.
दोस्तों यही कारण है कि नवरात्रि का पर्व साल में दो बार मनाया जाता है.यह पोस्ट अच्छा लगे तो जय माँ दुर्गे जरुर लिखें और फॉलो के साथ लाइक करना न भूलें.

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